13 May 2019

प्रलय

अब अख़बार पढ़ते हुए कोई भी बात चौंकाती नहीं ! बलात्कार, अप्रहण, गूसख़ोरी, छेड़छड़, लूटपाट आदि नॉर्मल हो गये है हम लोगों के लिए | जब तक ये वारदातें किसी अपने के साथ ना हों नॉर्मल लगती हैं। सब जगह यही हाल है । हर तरफ एक ही तरह की वारदातें देख कर लगता है मेरा देश एक हो गया है। भुखमरी,बलात्कार और भ्र्ष्टाचारी हमारी राष्ट्रिय एकता के सबसे ताकतवर तत्व बन गए हैं । भाईचारा अपनापन जैसे तत्व कमज़ोर पड़ गए हैं । कैसी अद्भुत एकता है। पंजाब का गेंहूं गुजरात के कालाबाजार में बिकता है ।और मध्य प्रदेश का का चावल कोलकाता के मुनाफाखोर के गोदाम में भरा है। सब सीमाएं टूट गयी हैं क्योंकि देश एक हैं l बलात्कारियों, मुनाफाखोरों, कालाबाजारियों, भ्र्ष्टाचरियों ने मिलकर राष्ट्र को एक कर दिया है ' ।

हाँ, कुछ बातें ज़रूर चौंकाती है जैसे: “किसी प्रेमी युगल ने मिल कर एक लाख से अधिक पौधे लगा दिए” - बेवक़ूफ़ थे ये लोग जो पौधे लगाने में अपना टाइम ख़राब कर दिया तुम तो स्वर्ग सिधार लोगे थोड़े सालों बाद  फिर क्या आचार डालोगे इन पेड़ों का ज़्यादा से तुम्हारी आने वाली पीढ़ियों को शीतल छाया और शुद्ध हवा मिल जाएगी इस  ज़्यादा क्या होगा ।

“एक सन्यासी गंगा की सफ़ाई के लिए अनशन करता हुआ देवलोक गमन कर लिया” - बाबा भी कम बेवक़ूफ़ नहीं रहे होंगे अरे इतना सारा पानी तो पड़ा है पीने के लिए व्यर्थ में ही अपनी जान गँवा दी वो भी उस नदी को साफ़ करवाने के लिए जो ख़ुद लोगों के पाप हर लेती है ।अनशन करना ही है तो मन्दिर या मस्जिद बनाने के लिए कर लेते क्या पता एम॰पी॰ या एम॰एल॰ए॰ बनने का मौक़ा मिल जाए ।

“टेक्सी वाले ने टेक्सी में रह गये पैसे मालिक को वापस लौटाए” -ये महानुभव तो सबसे ज़्यादा बेवक़ूफ़ निकले पैसे लौटने जैसी कुप्रथा को जन्म दे रहे है। लगता है टेक्सी चलाने से आमदनी कुछ ज़्यादा ही हो गयी है ।

और भ्र्ष्टाचार जैसे मुद्दे तो अब मुद्दे रहे ही नहीं अगर कोई नेता ग़लती से इन पर बात भी कर दे तो अनसुना कर दिया जाता है पीछे से जोर से आवाज आती है ''मंदिर वहीं बनाएँगे''। क्यूँकि हमने तो सर्वांगिन विकास कर लिया है और तो करने को कुछ बचा ही नहीं है और देश में इतनी मखियाँ भी नहीं की हमारे नेता बैठ कर मखियाँ मार सके इसलिए तो वो सिर्फ धर्म और जाति पर ही बोलते है। कभी कोई ये क्यूँ नहीं बोलता "स्कूल वहीं बनाएँगे'' अरे ऐसा तो हरगिज मत बोलना भगवान राम बुरा मान जाएँगे और शिव तीसरा आँख खोल देंगे और धरती पर भीषण प्रलय आ जायेगा । फिर न तुम बचोगे ना हम बचेंगे तो सिर्फ कॉकरोच।


©️Vikram N Khorwal

9 May 2019

सच्चा लेखक

एक लेखक कवि अथवा कहानीकार होना दुनिया के सबसे अद्भुत अनुभवों में से एक है  आप अपनी भावनाएँदुःख-दर्द  अच्छे बुरेअनुभव किसी काग़ज़ पर लिखते है और लोग उन्हें पढ़कर ख़ुद के जीवन की समानताओं को उसमें ढूँढने की कोशिश करते है  किसी ने सही कहा है अच्छा लेखक कभी मरता नहीं है  वह अपनी लिखी कहानियों और किताबों में हज़ारों साल तक जीवित रहता है एक सच्चा लेखक होने की निशानी यह है की आप वही लिखते हो जो आप लिखना चाहते है और जिस दिन वह लिखना शुरू कर दिया जोलोग आप से लिखवाना चाहते हैजो आप के मन की उपज के विपरीत है तो आप के अंदर का लेखक मर जाएगा  लेखक अपनी कल्पनाओंकी दुनिया में रहता हैं जहाँ वह अपने ख़्यालों को उपजाता है और जब ये ख़्याल किसी सुंदर कहानी का रूप लेते है तो पढ़ने वाला निश्चय हीआनंद लेता है।

सच्चा लेखक कभी किसी से बेहतर नहीं लिखना चाहेगा वो सिर्फ़ अपना बेहतर लिखना चाहेगा। 


©️Vikram N Khorwal

विपक्ष का अंत

अभी एक सपना देखा की राहुल गांधी के साथ कई नेताओं ने बी॰जे॰पी॰ जोईंन कर ली थी। तभी वो अचानक से भक्तों के लिए पप्पू से राहुलहो गये थे  वाहटस एप यूनिवर्सिटी में भक्तों की पोस्ट में गांधी परिवार की अच्छी बातों के अलावा कुछ नहीं दिख रहा था कुछ लोग राहुल कीतारीफ़ों के पुल बाँध रहे थे (जो थोड़ा सा funny था )  लोगों की एंटीराहुल आइडियोलोजि जैसे मर चुकी थी  कुछ लोग इस गठबंधन का श्रेयअमित शाह को दे रहे थे  देश में विपक्ष का अंत हो चुका था  मोदी और राहुल साथ में ही बैठे थे  मोदी के भाषण  बाद राहुल का नम्बरआने वाला था  शायद ऐसा दोंनों ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए किया होगा क्योंकि “सत्ता सुख परम सुख”  अब सरकार की ग़लत नीतियोंपर बोलने वालों में कुछ लेखकों और गिने चुने पत्रकारों के अलावा कोई नहीं बचा था जिन्हें भी अपनी सुरक्षा का डर सता रहा था  यह एकबहुत ही भयावह सपना था 

सत्ता में विपक्ष का ना होना वास्तव में बहुत ही भयानक होता हैं  इसीलए अपने घर से निकलिए और वोट देने जाइए क्योंकि आपका वोट एक बहुमत की सरकार नहीं तो एक मज़बूत विपक्ष ज़रूर बनाएगा 


©Vikram N Khorwal