सपने आँखों में चुभते है
नींद कहाँ से आएगी
रात है बहुत बड़ी
चुनौतियां भी हार जाएगी
प्रबल हवाएं टहनियों से
कुछ इस तरह से टकराएगी
सुखी पतियों की तरह बाधाएं
राह में बिखर जाएगी
पथ में तेरी है जो कांटे
फूल ब्याज जाएंगे
नई सुबह का आगाज कर
सुगंध वो फैलाएंगे
तीर जब आँख को
अर्जुन की तरह भेद पाएगी
लक्ष्यों के बीच है जो दूरियाँ
वो भी मिट जाएगी
©️Vikram N Khorwal
अब आ गए हो तो कुछ कॉमेंट करते जाना
ReplyDeleteA Huge Motivation Sir
ReplyDeleteसफलता और संघर्ष। 😊👌
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