5 December 2019

सपने आँखों में चुभते है

सपने आँखों में चुभते है
नींद कहाँ से आएगी 
रात है बहुत बड़ी 
चुनौतियां भी हार जाएगी 

प्रबल हवाएं टहनियों से 
कुछ इस तरह से टकराएगी 
सुखी पतियों की तरह बाधाएं 
राह में बिखर जाएगी 

पथ में तेरी है जो कांटे 
फूल ब्याज जाएंगे 
नई सुबह का आगाज कर 
सुगंध वो फैलाएंगे 

तीर जब आँख को 
अर्जुन की तरह भेद पाएगी 
लक्ष्यों के बीच है जो दूरियाँ 
वो भी मिट जाएगी 


©️Vikram N Khorwal

3 comments:

  1. अब आ गए हो तो कुछ कॉमेंट करते जाना

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  2. A Huge Motivation Sir

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  3. सफलता और संघर्ष। 😊👌

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