25 July 2018

रंगीन चूड़ियाँ




मैं बार बार ऑफ़िस की दीवार पर लगी घड़ी की तरफ़ देख रहा था और ऑफ़िस की छुट्टी होने का इंतज़ार कर रहा था आज बार बार यूँ ऑफ़िस की घड़ी को देखने के पीछे एक विशेष कारण भी था ।तभी मोबाइल फ़ोन की रिंग बजी और मेने फ़ोन उठाया
हैलो
हाँ बेटा बोलिएमैंने कहा 
पापा आप घर कब रहे हो आज मेरा बर्थ डे है आप को याद है ना
मैं आप का बर्थडे कैसे भूल सकता हूँ ओफ़्फ़िस की छुट्टी होते ही में घर रहा हुँ” 
आप जल्दी जाना
कॉल था मेरी पाँच साल की बेटी का जिसका आज बर्थ डे है।
फ़ोन रखते ही मैंने मेरी डेस्क से सामान समेटा और घर जाने के लिए सीटी बस स्टेण्ड की तरफ़ रवाना हो गया
वहाँ कोई सिटी बस आती ना देख मैंने एक टेक्सी रुकवाई और उस में बेठ कर घर की तरफ़ रवाना हो गया  
टेक्सी में बेठने के कुछ समय बाद ही मुख्य काँच की तरफ़ लगी उन रंगीन चूड़ियों ने मेरा ध्यान आकर्षित किया वो चूड़ियाँ बहुत ही प्यारी थी जो की किसी नन्हें हाथों की कलाई के लिए बनाई गयी हो काफ़ी देर तक उन चूड़ियों को देखने के बाद मुझ से रहा नहीं गया और मैंने टेक्सी ड्राइवर से पूछा 
भैया मैं बहुत सी टेक्सियों में बेठा हूँ किसी टेक्सी में मुख्य काँच पर भगवान की तस्वीर तो किसी के टेडी बीयर वगेरह लगे देखता हूँ पर आप ने यें चूड़ियाँ क्यूँ लगा रखी हैं  
टेक्सी ड्राइवर ने एक गहरी सोच में डूबते हुए कहा 
साहब ये चूड़ियाँ कभी मेरी बेटी के नन्हें हाथों में खनका करती थी जिस खनक से मेरा पूरा घर गूँजा करता था  
लेकिन उन दरिंदो ने मेरी पाँच साल की बच्ची को तो नहीं छोड़ा बस उसकी आख़री निशानी ये चूड़ियाँ ही बची हैं जिनको मैंने यहाँ टाँग दिया हैं जब भी इनकी खनक की आवाज़ मेरे कानों में पड़ती हैं तो ऐसा लगता हैं वो मेरे पास में ही हैं ” 

मैं उन आँसुओं को देख रहा था जिनको वो टेक्सी ड्राइवर रोकने की कोशिस कर रहा था ये सब बातें सुन कर मेरे मन में भी मेरी बेटी की चिंता के बादल छाने लगे थे उन चूड़ियों की खनक को में सुनने में असहज महसूस कर रहा था प्रत्येक खनक मुझे उस मासूम के साथ हुई हैवानियत की याद दिला रही थी  



©Vikram N Khorwal