यह मूवी नाजियों के यहूदियों पर किए गए अत्याचार के इर्द गिर्द रचित है। ठीक वैसे ही जैसे “दी बुक थीफ” में बताया गया है। वैसे यह टॉपिक “नाजियों का यहूदियों पर अत्याचार” ऐसा टॉपिक है जिस पर मैं हजारों पन्ने लिख सकता हूँ और यह छोटी बात ही होगी क्योंकि जो मुद्दे विश्व युद्ध करवा सकते है वो छोटे नहीं हो सकते है। अगर भारत में वर्तमान परिदृश्य में देखे तो “दलित अत्याचार” भी कुछ ऐसा ही है मुद्दा है पर डरने की बात नहीं है यह किसी तरह के विश्व युद्द का कारण नहीं बन सकता क्योंकि लोगों ने इसे देख कर आंखे बंद करने की आदत बना ली है। ठीक गांधी जी के उस बंदर की तरह की बुरा मत देखो, ओ सॉरी में मुद्दे से भटक गया। हम मूवी की बात करने वाले थे ना। चलो उसी की बात कर लेते है।
जोजो एक छोटा बच्चा है जिसके दिलों दिमाग पर हिटलर ने घर कर दिया और बचपन से ही जोजो ने खुद को कट्टर नाजी समझ लिया है पर वास्तविकता में वह है नहीं। पर शायद उसके अंदर का हिटलर वास्तविकता वाले हिटलर जितना क्रूर नहीं है। जब जोजो को यह बात पता चलती है की उसकी माँ ने घर में एक यहूदी लड़की को छुपाया है तो जोजो को यह बात जचती नहीं और वह उस लड़की मारने के लिए जाता है। पर सच तो यह है की जोजो जैसे बच्चे को मौत के सही मायने नहीं पता होते है। खेर वो उस लड़की को मार तो नहीं पाता पर वह लड़की उसकी दोस्त जरूर बन जाती है। जिसे वो नाजियों से बचा कर अपने घर में रखता है। पर नाजियों की कट्टर सोच जोजो से उसकी माँ को छिन लेती है। और अंत तक वो लड़की जोजो के अंदर के हिटलर को मारने में समर्थ होती है। खेर देखा जाए तो हम सब जोजो ही है जिसके अंदर एक हिटलर हमेशा रहता है। बस सब को वो लड़की नहीं मिलती जो अंदर के हिटलर को मार सके।
वैसे मेने पढ़ा था की हिटलर ने खुद के सर पर गोली मार कर आत्महत्या कर ली थी। पर क्या यह सच है की वो इतनी आसानी से मार जाता है। जिस आदमी ने करोड़ों जर्मन लोगों के मन में यहूदियों को लेकर नफरत भरी वो कैसे मर सकता था। क्योंकि नफरत तो कभी मरती नहीं वो अपने रूप बदल लेती है। कभी वो नफरत भीड़ का रूप लेकर किसी निर्दोष को मारती है तो वो हिटलर पुनः जीवित हो जाता है। जब भी तुम अपना कट्टर रूप धारण करते हो तो आप में एक हिटलर पैदा हो जाता है। कट्टर होने का मतलब ही है हिटलर होना। जब तुम कट्टर हो जाओगे तब तुम्हें अपना धर्म खतरे में लगेगा और फिर शुरू होगा निर्दोष हत्याओं का दौर। एक खूबसूरत देश देखते ही देखते आस्विज के यातना शिविरों में बदल जाता है जहाँ निर्दोष इंसानों की चीखो के अलावा कुछ नहीं सुनाई देता है। अतः कट्टरता हमेशा होलोकॉस्ट ही लाती है।
©Vikram N Khorwal